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फैसला… घूसखोर पटवारी को चार साल का कारावास
कोर्ट ने कहा- भ्रष्टाचार रोकने के लिए सजा जरूरी
लोकायुक्त के हत्थे चढ़ी थी ढाई हजार रुपए लेते हुए…
उज्जैन। जिले की विशेष न्यायालय ने बुधवार को एक रिश्वतखोरी के केस में फैसला सुनाया। कोर्ट ने फरियादी के मुकरने पर भी घूसखोर पटवारी को सजा और अर्थदंड देते हुए भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणी की। पटवारी नामांतरण के बदले ढाई हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए करीब डेढ़ साल पहले पकड़ी गई थी।
ग्राम टंकारिया निवासी बालकृष्ण पटेल ने गांव में ही डेढ़ बीघा जमीन खरीद थी। इसका नामांतरण के लिए उससे हलका नंबर 13 की पटवारी रंजीता टेलर सोनगरा ने घूस मांगी थी। रुपए के लिए सोनगरा ने पटेल की जमीन की रजिस्ट्री भी रख ली थी।
पटेल लोकायुक्त में मय प्रमाण शिकायत कर करने के बाद योजनानुसार 20 जून 2016 को सोनगरा के प्रगति नगर घर 2500 रुपए देने पहुंचा। यहां सोनगरा के रुपए लेते ही लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव व उनकी टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
उस पर रिश्वत मांगने और लेने का केस दर्ज कर श्रीवास्तव ने विशेष न्यायाधीश डीएल सोलंकी के समक्ष चालान पेश किया था। यहां अब तक की सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने सोनगरा को धारा 7 में चार साल व धारा 13(2) में भी चार साथ सजा सुनाई। साथ ही दोनों धाराओं में चार हजार रुपए अर्थदंड दिया।
वॉइस रिकॉर्ड में फंस गई
बताया जाता है कि प्रकरण में फरियादी पटेल ने बयान बदल दिए थे लेकिन कोर्ट ने मजबूत साक्ष्य, वाइस रिकॉर्डिंग और पंचों की गवाह के आधार पर दोषी सिद्ध होने पर सजा दी। प्रकरण में विशेष लोकायुक्त अभियोजक मनोज कुमार पाठक ने पैरवी की।
कोर्ट ने कहा- कठोर दंड जरूरी
इस फैसले में खास बात यह रही कि न्यायालय ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि समाज में भ्रष्टाचार की प्रवृति बड़ती जा रही है। उसे रोकने के लिए कठोर दंड आवश्यक है। यही वजह है कि पटवारी के महिला होने के बाद भी कोर्ट ने उसे रियायत न देते हुए तुरंत जेल भेज दिया।